श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.48.13 
अकाले चापि मुख्यानि पुष्पाणि च फलानि च।
दर्शयिष्यन्त्यनुक्रोशाद् गिरयो राममागतम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ के पर्वत बड़े आदर के साथ, अपने यहाँ आए हुए श्री रामजी को, ऋतु-विहीन अवस्था में भी, उत्तम-उत्तम पुष्प और फल भेंट करेंगे॥13॥
 
‘Out of great respect the mountains there will present the choicest of flowers and fruits to Sri Rama who has come to their place even in the off-season.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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