श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.48.10 
शोभयिष्यन्ति काकुत्स्थमटव्यो रम्यकानना:।
आपगाश्च महानूपा: सानुमन्तश्च पर्वता:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वे सुन्दर वन-श्रेणियाँ जो सुन्दर वृक्षों से सुशोभित हैं, बड़े-बड़े घाटियों वाली नदियाँ और ऊँचे शिखरों वाले पर्वत हैं, वे भगवान् रामजी की शोभा बढ़ाने वाले हैं॥ 10॥
 
‘Those beautiful forest ranges which are adorned with lovely groves, rivers with large basins and mountains with tall peaks will enhance the beauty of Lord Rama.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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