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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना
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श्लोक 5
श्लोक
2.47.5
कथं रामो महाबाहु: स तथावितथक्रिय:।
भक्तं जनमभित्यज्य प्रवासं तापसो गत:॥ ५॥
अनुवाद
'महाबाहु श्री राम, तपस्वी वेशधारी और जिनके कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते, वे हम भक्तों को छोड़कर परदेश (वन) में कैसे चले गए?॥5॥
'How did the mighty-armed Shri Ram, dressed ascetic and whose actions never go in vain, leave us, the devotees, and go to a foreign land (forest)?॥ 5॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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