श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.47.14 
रथमार्गानुसारेण न्यवर्तन्त मनस्विन:।
किमिदं किं करिष्यामो दैवेनोपहता इति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय, "क्या हुआ? अब हम क्या करें? देवताओं ने हमें मार डाला है?" ऐसा कहकर वे बुद्धिमान पुरुष रथ के पीछे-पीछे अयोध्या को लौट गए॥14॥
 
At that time, saying, "What has happened? What should we do now? The gods have killed us," those wise men followed the track of the chariot and returned to Ayodhya. ॥14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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