श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.47.13 
ततो मार्गानुसारेण गत्वा किंचित् तत: क्षणम्।
मार्गनाशाद् विषादेन महता समभिप्लुता:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
फिर वे सब लोग रथ के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए बहुत दूर चले गए; परंतु क्षण भर में ही मार्ग का कोई चिह्न न पाकर वे महान शोक में डूब गए ॥13॥
 
Then, following the track of the chariot, all of them went far away; but in a moment, as they could not find any sign of the path, they were drowned in great sorrow. ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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