श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.47.12 
इतीव बहुधा वाचो बाहुमुद्यम्य ते जना:।
विलपन्ति स्म दु:खार्ता हृतवत्सा इवाग्रॺगा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह सब कहकर नगर के सभी लोग हाथ उठाकर विलाप करने लगे। वे शोक से व्याकुल हो रहे थे, जैसे बछड़ों से बिछड़ी हुई प्रमुख गायें।
 
Saying all these things, all the people of the city raised their arms and started wailing. They were distraught with grief like the leading cows separated from their calves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)