श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.47.11 
निर्यातास्तेन वीरेण सह नित्यं महात्मना।
विहीनास्तेन च पुन: कथं द्रक्ष्याम तां पुरीम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'हम वीर महात्मा श्री राम के साथ सदा रहने के लिए निकले थे। अब उनसे वियोग में हम अयोध्यापुरी को कैसे देख सकेंगे?'॥11॥
 
'We had set out to live with the valiant Mahatma Shri Ram forever. Now, being separated from him, how will we be able to see Ayodhyapuri?'॥ 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas