श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.47.10 
सा नूनं नगरी दीना दृष्ट्वास्मान् राघवं विना।
भविष्यति निरानन्दा सस्त्रीबालवयोऽधिका॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'स्त्रियाँ, बालक और वृद्धों सहित सम्पूर्ण अयोध्या नगरी, हम लोगों को श्री राम के बिना लौटते हुए देखकर अवश्य ही दुःखी और हर्षहीन हो जाएगी॥ 10॥
 
'The entire city of Ayodhya, including the women, children and the aged, will certainly become sad and joyless when they see us returning without Shri Rama.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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