श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.46.6 
पितरं चानुशोचामि मातरं च यशस्विनीम्।
अपि नान्धौ भवेतां नौ रुदन्तौ तावभीक्ष्णश:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इस समय मैं अपने पिता और माता यशस्विनी के लिए अत्यन्त दुःखी हो रहा हूँ; कहीं ऐसा न हो कि वे निरन्तर रोने से अंधे हो जाएँ॥6॥
 
‘At this moment I am feeling very sad for my father and mother Yashaswini; lest they become blind due to incessant crying.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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