श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.46.4 
अद्यायोध्या तु नगरी राजधानी पितुर्मम।
सस्त्रीपुंसा गतानस्मान् शोचिष्यति न संशय:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘आज मेरे पिता की राजधानी अयोध्या नगरी समस्त नर-नारियों सहित हम वन में आए हुए लोगों के लिए विलाप करेगी, इसमें संशय नहीं है।॥4॥
 
'Today, my father's capital city Ayodhya, along with all the men and women, will mourn for us who have come to the forest, there is no doubt about it. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)