श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.46.27 
अयं युक्तो महाबाहो रथस्ते रथिनां वर।
त्वरयाऽऽरोह भद्रं ते ससीत: सहलक्ष्मण:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! हे रथियों में श्रेष्ठ! तुम्हारा कल्याण हो। तुम्हारा रथ तैयार है। अब सीता और लक्ष्मण सहित शीघ्रता से उस पर चढ़ो।॥27॥
 
‘Mahabaho! O bravest of all charioteers! May you be blessed. Your chariot is ready. Now board it quickly along with Sita and Lakshman.’॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)