श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.46.25 
अथ रामोऽब्रवीत् सूतं शीघ्रं संयुज्यतां रथ:।
गमिष्यामि ततोऽरण्यं गच्छ शीघ्रमित: प्रभो॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब श्री राम ने सुमन्तराम से कहा - 'प्रभु! आप जाकर शीघ्रता से रथ में जुतियाँ लगाएँ और उसे तैयार करें। फिर मैं शीघ्र ही यहाँ से प्रस्थान करके वन को चला जाऊँगा।'॥ 25॥
 
Then Shri Ram said to Sumantram - 'Prabhu! You go and quickly harness the chariot and get it ready. Then I will quickly leave from here and go to the forest.'॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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