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श्लोक 2.46.24  |
अब्रवील्लक्ष्मणो रामं साक्षाद् धर्ममिव स्थितम्।
रोचते मे तथा प्राज्ञ क्षिप्रमारुह्यतामिति॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| यह सुनकर लक्ष्मण ने धर्म के समान उपस्थित भगवान् श्री राम से कहा - 'अत्यन्त बुद्धिमान आर्य! मुझे आपकी सलाह अच्छी लगी। शीघ्रता से रथ पर चढ़ो।'॥24॥ |
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| On hearing this, Lakshmana said to Lord Shri Ram who was present like Dharma himself - 'Very intelligent Arya! I like your advice. Mount the chariot quickly.'॥ 24॥ |
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