श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.46.24 
अब्रवील्लक्ष्मणो रामं साक्षाद् धर्ममिव स्थितम्।
रोचते मे तथा प्राज्ञ क्षिप्रमारुह्यतामिति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर लक्ष्मण ने धर्म के समान उपस्थित भगवान् श्री राम से कहा - 'अत्यन्त बुद्धिमान आर्य! मुझे आपकी सलाह अच्छी लगी। शीघ्रता से रथ पर चढ़ो।'॥24॥
 
On hearing this, Lakshmana said to Lord Shri Ram who was present like Dharma himself - 'Very intelligent Arya! I like your advice. Mount the chariot quickly.'॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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