श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.46.23 
पौरा ह्यात्मकृताद् दु:खाद् विप्रमोच्या नृपात्मजै:।
न तु खल्वात्मना योज्या दु:खेन पुरवासिन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'राजकुमारों का कर्तव्य है कि वे अपने नगर के नागरिकों को उनके द्वारा उत्पन्न कष्टों से मुक्त करें, न कि अपने कष्टों को उन पर डालकर उन्हें और अधिक दुखी करें।'॥23॥
 
'It is the duty of princes to free the citizens of their cities from the sufferings they cause, and not to make them more miserable by passing on their own sufferings to them.'॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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