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श्लोक 2.46.21  |
यावदेव तु संसुप्तास्तावदेव वयं लघु।
रथमारुह्य गच्छाम: पन्थानमकुतोभयम्॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| अतः जब तक वह सो रहा है, हम शीघ्र ही अपने रथ पर सवार होकर यहाँ से चले जाएँ। तब हमें इस मार्ग पर आनेवाले किसी अन्य व्यक्ति का भय नहीं रहेगा॥ 21॥ |
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| ‘So while he is sleeping, let us quickly ride our chariot and leave from here. Then we will not have to fear anyone else coming on this route.॥ 21॥ |
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