श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.46.20 
यथैते नियमं पौरा: कुर्वन्त्यस्मन्निवर्तने।
अपि प्राणान् न्यसिष्यन्ति न तु त्यक्ष्यन्ति निश्चयम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘जिस प्रकार वह हमें वापस ले जाने का प्रयत्न कर रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने प्राण त्याग देगा, परन्तु अपना संकल्प नहीं छोड़ेगा ॥20॥
 
‘The way he is making efforts to take us back, it seems that he will sacrifice his life but will not give up his resolve.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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