श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.46.14 
तां शय्यां तमसातीरे वीक्ष्य वृक्षदलैर्वृताम्।
राम: सौमित्रिणा सार्धं सभार्य: संविवेश ह॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तमसा नदी के तट पर वृक्ष के पत्तों से बनी उस शय्या को देखकर भगवान राम, लक्ष्मण और सीता सहित उस पर बैठ गये।
 
Seeing that bed made of tree leaves on the bank of Tamasa, Lord Rama sat on it along with Lakshmana and Sita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)