vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना
»
श्लोक 14
श्लोक
2.46.14
तां शय्यां तमसातीरे वीक्ष्य वृक्षदलैर्वृताम्।
राम: सौमित्रिणा सार्धं सभार्य: संविवेश ह॥ १४॥
अनुवाद
तमसा नदी के तट पर वृक्ष के पत्तों से बनी उस शय्या को देखकर भगवान राम, लक्ष्मण और सीता सहित उस पर बैठ गये।
Seeing that bed made of tree leaves on the bank of Tamasa, Lord Rama sat on it along with Lakshmana and Sita.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×