श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.46.1 
ततस्तु तमसातीरं रम्यमाश्रित्य राघव:।
सीतामुद्वीक्ष्य सौमित्रिमिदं वचनमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तमसा के सुन्दर तट पर आश्रय लेकर श्री राम ने सीता की ओर देखकर सुमित्राकुमार लक्ष्मण से इस प्रकार कहा- 1॥
 
After that, taking shelter on the beautiful banks of Tamasa, Shri Ram looked towards Sita and said to Sumitra Kumar Lakshman thus - 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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