श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.45.7 
स हि कल्याणचारित्र: कैकेय्यानन्दवर्धन:।
करिष्यति यथावद् व: प्रियाणि च हितानि च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'उनका चरित्र अत्यंत सुंदर और सबके लिए कल्याणकारी है। कैकेयी का सुख बढ़ाने वाले भरत सदैव तुम्हें प्रिय रहेंगे और तुम्हारा कल्याण करेंगे।॥ 7॥
 
‘His character is very beautiful and is beneficial to everyone. Bharata, who increases the happiness of Kaikeyi, will always be dear to you and do good to you.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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