श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.45.29 
भक्तिमन्तीह भूतानि जङ्गमाजङ्गमानि च।
याचमानेषु तेषु त्वं भक्तिं भक्तेषु दर्शय॥ २९॥
 
 
अनुवाद
संसार के सभी सजीव और निर्जीव प्राणी आपके प्रति भक्ति रखते हैं। वे सभी आपके पुनः आगमन की प्रार्थना कर रहे हैं। अपने भक्तों के प्रति अपना स्नेह प्रदर्शित कीजिए।
 
‘All living and non-living creatures of the world have devotion towards you. They are all praying for you to return. Show your affection towards your devotees.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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