श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.45.22 
वाजपेयसमुत्थानि च्छत्राण्येतानि पश्य न:।
पृष्ठतोऽनुप्रयातानि मेघानिव जलात्यये॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'हमारे सफ़ेद छत्रों को देखो, जो तुम्हारे पीछे चल रहे हैं, जैसे वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु में सफ़ेद बादल दिखाई देते हैं। ये हमें वाजपेय यज्ञ में प्राप्त हुए थे।'
 
‘Look at our white umbrellas which are following you, like the white clouds seen in the autumn season after the monsoons are over. We received these in the Vajpayee Yajna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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