श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.45.21 
ब्राह्मण्यं कृत्स्नमेतत् त्वां ब्रह्मण्यमनुगच्छति।
द्विजस्कन्धाधिरूढास्त्वामग्नयोऽप्यनुयान्त्वमी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! आप ब्राह्मणों के हितैषी हैं, इसीलिए यह समस्त ब्राह्मण समाज आपके पीछे चल रहा है। अग्निदेव भी इन ब्राह्मणों के कंधों पर सवार होकर आपके पीछे चल रहे हैं॥ 21॥
 
‘Raghunandan! You are a well-wisher of the Brahmins, that is why this entire Brahmin community is following you. Even Agnidev is following you by riding on the shoulders of these Brahmins.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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