श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.45.17 
एवमार्तप्रलापांस्तान् वृद्धान् प्रलपतो द्विजान्।
अवेक्ष्य सहसा रामो रथादवततार ह॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वृद्ध ब्राह्मणों को इस प्रकार भावपूर्ण बातें करते देख श्री रामचन्द्रजी सहसा रथ से उतर पड़े।
 
Seeing the old Brahmins talking so passionately, Shri Ramchandraji suddenly got down from the chariot.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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