श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.44.9 
शिव: सर्वेषु कालेषु काननेभ्यो विनि:सृत:।
राघवं युक्तशीतोष्ण: सेविष्यति सुखोऽनिल:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘वन से आने वाली सुखद और शुभ वायु, जिसमें उचित शीत और उष्णता है, सदैव श्री रघुनाथजी की सेवा करेगी।॥9॥
 
‘The pleasant and auspicious wind with appropriate cold and heat coming from the forests at all times will serve Sri Raghunatha.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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