श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.44.8 
व्यक्तं रामस्य विज्ञाय शौचं माहात्म्यमुत्तमम्।
न गात्रमंशुभि: सूर्य: संतापयितुमर्हति॥८॥
 
 
अनुवाद
'श्री रामजी की पवित्रता और महानता को जानकर सूर्यदेव भी अपनी किरणों से उनके शरीर को हानि नहीं पहुँचा सकते।॥8॥
 
'Knowing the purity and greatness of Shri Rama, the Sun certainly cannot harm his body with its rays.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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