श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.44.7 
कीर्तिभूतां पताकां यो लोके भ्रमयति प्रभु:।
धर्म: सत्यव्रतपर: किं न प्राप्तस्तवात्मज:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'जो प्रभु संसार में अपनी कीर्ति की ध्वजा फहरा रहे हैं और सत्यव्रत का पालन करने में सदैव तत्पर रहते हैं, वे धर्म के अवतार आपके पुत्र श्री रामजी ने कौन-सा पुण्य प्राप्त नहीं किया है?॥7॥
 
'The Lord who is hoisting the flag of His glory in the world and is always ready to follow the vow of truth, what merit has your son Shri Ram, who is the embodiment of Dharma, not achieved? ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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