श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.44.5 
वर्तते चोत्तमां वृत्तिं लक्ष्मणोऽस्मिन् सदानघ:।
दयावान् सर्वभूतेषु लाभस्तस्य महात्मन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'पापरहित लक्ष्मण समस्त प्राणियों पर दया करते हैं। वे श्री राम के प्रति सदैव अच्छा व्यवहार करते हैं, अतः यह उन महात्मा लक्ष्मण के लिए हितकर बात है।'
 
‘Sinless Lakshman is kind to all living beings. They always behave well towards Shri Ram, hence it is a matter of benefit for that Mahatma Lakshman. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)