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श्लोक 2.44.31  |
निशम्य तल्लक्ष्मणमातृवाक्यं
रामस्य मातुर्नरदेवपत्न्या:।
सद्य: शरीरे विननाश शोक:
शरद्गतो मेघ इवाल्पतोय:॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| लक्ष्मण की माता के उन वचनों को सुनकर राजा दशरथ की पत्नी और श्री राम की माता कौशल्या का सारा शोक उनके शरीर (मन) से उसी समय दूर हो गया, जैसे शरद ऋतु में थोड़ा जल वाला बादल शीघ्र ही विलीन हो जाता है॥31॥ |
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| On hearing those words of Lakshman's mother, all the grief of King Dasharath's wife and Shri Ram's mother Kausalya vanished instantly from her body (mind), just like a cloud with little water in the autumn season soon dissipates. ॥ 31॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे चतुश्चत्वारिंश: सर्ग:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें चौवालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४४॥ |
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