| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना » श्लोक 30 |
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| | | | श्लोक 2.44.30  | आश्वासयन्ती विविधैश्च वाक्यै-
र्वाक्योपचारे कुशलानवद्या।
रामस्य तां मातरमेवमुक्त्वा
देवी सुमित्रा विरराम रामा॥ ३०॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार वार्तालाप में कुशल, दोषरहित और मनोहर रूप वाली देवी सुमित्रा ने नाना प्रकार के वचनों द्वारा श्री राम की माता कौशल्या को आश्वस्त किया और फिर उपरोक्त वचन कहकर चुप हो गईं॥30॥ | | | | Goddess Sumitra, who was skilled in conversation, faultless and of a charming appearance, thus reassured Sri Rama's mother Kausalya with various kinds of words and then became silent after saying the above words. ॥ 30॥ | | ✨ ai-generated | | |
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