श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.44.29 
अभिवाद्य नमस्यन्तं शूरं ससुहृदं सुतम्।
मुदास्रै: प्रोक्षसे पुत्रं मेघराजिरिवाचलम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादल पर्वत को नहला देते हैं, वैसे ही तुम भी अपने मित्रों के साथ हर्षाश्रुओं से अपने वीर पुत्र का स्वागत और अभिषेक करोगे॥29॥
 
'Just as the clouds bathe the mountain, in the same way you will greet and anoint your brave son with tears of joy along with your friends.' 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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