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श्लोक 2.44.23  |
पुन: प्रविष्टं दृष्ट्वा तमभिषिक्तं महाश्रियम्।
समुत्स्रक्ष्यसि नेत्राभ्यां शीघ्रमानन्दजं जलम्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| 'जब तुम राजभवन में प्रवेश करोगे और अपने पुत्र को पुनः राजा के रूप में अभिषिक्त होते और बहुत-सी राज-संपत्ति से संपन्न देखोगे, तब शीघ्र ही तुम्हारी आँखों से आनन्द के आँसू बहने लगेंगे॥ 23॥ |
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| 'When you enter the royal palace and see your son anointed as the king again, blessed with a large royal wealth, you will soon shed tears of joy from your eyes.॥ 23॥ |
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