श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.44.23 
पुन: प्रविष्टं दृष्ट्वा तमभिषिक्तं महाश्रियम्।
समुत्स्रक्ष्यसि नेत्राभ्यां शीघ्रमानन्दजं जलम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'जब तुम राजभवन में प्रवेश करोगे और अपने पुत्र को पुनः राजा के रूप में अभिषिक्त होते और बहुत-सी राज-संपत्ति से संपन्न देखोगे, तब शीघ्र ही तुम्हारी आँखों से आनन्द के आँसू बहने लगेंगे॥ 23॥
 
'When you enter the royal palace and see your son anointed as the king again, blessed with a large royal wealth, you will soon shed tears of joy from your eyes.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd