श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.44.22 
शिरसा चरणावेतौ वन्दमानमनिन्दिते।
पुनर्द्रक्ष्यसि कल्याणि पुत्रं चन्द्रमिवोदितम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'कल्याणि! अनिन्दिते! तुम पुनः अपने पुत्र को नये चन्द्रमा के समान अपने चरणों में सिर रखकर प्रणाम करते हुए देखोगे। 22॥
 
'Kalyani! Anindite! You will again see your son saluting you with his head at your feet like the new moon. 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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