श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.44.14 
या श्री: शौर्यं च रामस्य या च कल्याणसत्त्वता।
निवृत्तारण्यवास: स्वं क्षिप्रं राज्यमवाप्स्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'श्री रामजी की शारीरिक शोभा, पराक्रम और कल्याणकारी शक्ति से ऐसा प्रतीत होता है कि वे वनवास से लौटकर शीघ्र ही पुनः अपना राज्य प्राप्त कर लेंगे॥ 14॥
 
'With the physical grace, valour and welfare-giving power of Shri Ram, it appears that after returning from his exile he will soon regain his kingdom.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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