श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.44.13 
यस्येषुपथमासाद्य विनाशं यान्ति शत्रव:।
कथं न पृथिवी तस्य शासने स्थातुमर्हति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जिसके बाण समस्त शत्रुओं का नाश करते हैं, उसके शासन में पृथ्वी और उसके प्राणी कैसे जीवित नहीं रह सकते?॥13॥
 
'How can the earth and its creatures not survive under the rule of the one whose arrows destroy all enemies?॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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