श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.43.19 
नहि तावद्‍गुणैर्जुष्टं सर्वशास्त्रविशारदम्।
एकपुत्रा विना पुत्रमहं जीवितुमुत्सहे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'एकमात्र पुत्र की माता होने के कारण मैं अपने उत्तम गुणों से युक्त तथा सम्पूर्ण शास्त्रों में पारंगत पुत्र श्री राम के बिना नहीं रह सकती।॥19॥
 
'As a mother of an only son, I cannot live without my son, Shri Ram, who is endowed with excellent virtues and well versed in all the scriptures.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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