श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.43.18 
साहं गौरिव सिंहेन विवत्सा वत्सला कृता।
कैकेय्या पुरुषव्याघ्र बालवत्सेव गौर्बलात्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषसिंह! जैसे सिंह अपनी प्यारी गाय को उसके छोटे बछड़े से बलपूर्वक अलग कर देता है, उसी प्रकार कैकेयी ने भी मुझे बलपूर्वक मेरे पुत्र से अलग कर दिया है॥18॥
 
'Purushasingh! Just as a lion forcibly deprives a loving cow of her small calf, in the same way Kaikeyi has forcibly separated me from my son.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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