श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.43.17 
नि:संशयं मया मन्ये पुरा वीर कदर्यया।
पातुकामेषु वत्सेषु मातॄणां शातिता: स्तना:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'वीर! इसमें संदेह नहीं कि पूर्वजन्म में मुझ नीच स्वभाव और विचार वाली स्त्री ने बछड़ों के दूध पीते ही उनकी माताओं के स्तन काट डाले होंगे॥ 17॥
 
'Valiant! There is no doubt that in my previous life, I, a woman of low morals and thoughts, must have cut off the breasts of their mothers as soon as the calves were ready to drink milk.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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