| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 2.43.16  | कदा परिणतो बुद्धॺा वयसा चामरप्रभा:।
अभ्युपैष्यति धर्मात्मा सुवर्ष इव लालयन्॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | ज्ञान में उन्नत और आयु में देवताओं के समान तेजस्वी पुण्यात्मा श्री राम कब यहाँ आएंगे और उत्तम वर्षा के समान प्रजा का पोषण करेंगे? | | | | When will the virtuous Sri Rama, advanced in knowledge and as radiant as the gods in age, come here nourishing the people like a good rain? | | ✨ ai-generated | | |
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