श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.43.12 
कदायोध्यां महाबाहु: पुरीं वीर: प्रवेक्ष्यति।
पुरस्कृत्य रथे सीतां वृषभो गोवधूमिव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे बैल गौओं को आगे-आगे ले जाता है, वैसे ही वीर, पराक्रमी राम सीता को आगे-आगे लेकर रथ पर सवार होकर अयोध्यापुरी में कब प्रवेश करेंगे?॥12॥
 
‘Just as a bull leads the cows in front, when will the valiant, powerful Rama enter Ayodhyapuri on his chariot with Sita in front?॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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