श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.43.11 
कदा प्रेक्ष्य नरव्याघ्रावरण्यात् पुनरागतौ।
भविष्यति पुरी हृष्टा समुद्र इव पर्वणि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम श्री राम और लक्ष्मण को वन से लौटते देख अयोध्या पूर्णिमा के दिन उमड़ते समुद्र के समान आनन्द से कब भर जाएगी?
 
When will Ayodhya be filled with joy like the surging sea on the full moon day, seeing the best of men, Shri Ram and Lakshmana returning from the forest?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas