श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.43.1 
तत: समीक्ष्य शयने सन्नं शोकेन पार्थिवम्।
कौसल्या पुत्रशोकार्ता तमुवाच महीपतिम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
पुत्र शोक से व्याकुल होकर शय्या पर पड़े हुए राजा को देखकर पुत्र शोक से पीड़ित हुई कौसल्या ने उस राजा से कहा -॥1॥
 
Seeing the king lying on his bed, distraught with grief for his son, Kausalya, who was also afflicted with the grief of her son, said to that King -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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