श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 42: राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.42.6 
कैकेयि मामकाङ्गानि मा स्प्राक्षी: पापनिश्चये।
नहि त्वां द्रष्टुमिच्छामि न भार्या न च बान्धवी॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'हे पापमय विचारों वाली कैकेयी! मेरे अंगों को मत छुओ। मैं तुम्हें देखना नहीं चाहता। तुम न तो मेरी पत्नी हो और न ही मेरी दासी।' 6॥
 
'Kaikei, the one with sinful thoughts! Don't touch my body parts. I don't want to see you. You are neither my wife nor my slave. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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