| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 42: राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना » श्लोक 31-32 |
|
| | | | श्लोक 2.42.31-32  | तच्च दृष्ट्वा महाराजो भुजमुद्यम्य वीर्यवान्।
उच्चै:स्वरेण प्राक्रोशद्धा राम विजहासि नौ॥ ३१॥
सुखिता बत तं कालं जीविष्यन्ति नरोत्तमा:।
परिष्वजन्तो ये रामं द्रक्ष्यन्ति पुनरागतम्॥ ३२॥ | | | | | | अनुवाद | | उसे देखकर वीर राजा ने एक भुजा उठाकर बड़े जोर से विलाप करते हुए कहा, 'हे राम! आप हम दोनों माता-पिता को त्याग रहे हैं। जो पुरुष श्रेष्ठ चौदह वर्ष तक जीवित रहेंगे और श्री राम को आलिंगन करते हुए अयोध्या लौटते देखेंगे, उन्हें सचमुच सुख होगा।'॥31-32॥ | | | | Seeing him, the valiant king raised one arm and lamented loudly, saying, 'Oh Rama! You are abandoning both of us, parents. The best of men who live for a period of fourteen years and see Sri Rama returning to Ayodhya with an embrace will be truly happy.'॥ 31-32॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|