श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 42: राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.42.28 
इति ब्रुवन्तं राजानमनयन् द्वारदर्शिन:।
कौसल्याया गृहं तत्र न्यवेस्यत विनीतवत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर द्वारपालों ने बड़ी विनम्रता से राजा दशरथ को रानी कौशल्या के महल में ले जाकर शय्या पर सुला दिया॥28॥
 
Having said this, the gatekeepers very politely conducted King Dasaratha to Queen Kausalya's palace and made him sleep on a bed.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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