श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 42: राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.42.20 
अनभिज्ञा वनानां सा नूनं भयमुपैष्यति।
श्वपदानर्दितं श्रुत्वा गम्भीरं रोमहर्षणम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'वह वन के कष्टों से अनभिज्ञ है। वहाँ व्याघ्र आदि हिंसक पशुओं की तेज और रोमांचकारी गर्जना सुनकर तुम अवश्य ही भयभीत हो जाओगे। 20॥
 
'He is unaware of the sufferings of the forest. There you will definitely get scared after hearing the loud and thrilling roar of predatory animals like tiger etc. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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