श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 42: राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.42.19 
सा नूनं जनकस्येष्टा सुता सुखसदोचिता।
कण्टकाक्रमणक्लान्ता वनमद्य गमिष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'जनक की प्रिय पुत्री सीता, जो केवल शाश्वत सुखों के लिए ही योग्य है, आज काँटों पर पैर रखने का कष्ट अनुभव करती हुई अवश्य ही वन में जाएगी।॥19॥
 
'Sita, the beloved daughter of Janaka, who is fit only for eternal pleasures, will surely go to the forest today, feeling the pain of stepping on thorns.॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas