श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 42: राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.42.18 
द्रक्ष्यन्ति नूनं पुरुषा दीर्घबाहुं वनेचरा:।
राममुत्थाय गच्छन्तं लोकनाथमनाथवत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘निश्चय ही वन में रहने वाले लोग लोकनाथ महाबाहु श्री राम को अनाथ की भाँति वहाँ से उठकर जाते हुए देखेंगे।॥18॥
 
‘Surely the people living in the forest will see Lokanath Mahabahu Shri Ram getting up and leaving from there like an orphan.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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