श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 42: राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.42.10 
अथ रेणुसमुद‍्ध्वस्तं समुत्थाप्य नराधिपम्।
न्यवर्तत तदा देवी कौसल्या शोककर्शिता॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शोक से विह्वल हुई देवी कौशल्या ने उस समय भूमि पर लोटने के कारण धूल से आच्छादित हुए महाराज को उठा लिया और उनके साथ राजमहल में लौट आईं॥10॥
 
Thereafter the goddess Kausalya, overwhelmed with grief, picked up the Maharaja, who was covered in dust due to rolling on the ground at that time, and returned with him to the royal palace.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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