श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम के वनगमन से रनवास की स्त्रियों का विलाप तथा नगरनिवासियों की शोकाकुल अवस्था  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.41.5 
कैकेय्या क्लिश्यमानेन राज्ञा संचोदितो वनम्।
परित्राता जनस्यास्य जगत: क्व नु गच्छति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'हमारी और सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करने वाले श्री रघुवीर उस समय कहाँ चले गए, जब कैकेयी के द्वारा संकट में डाले हुए राजा ने उन्हें वन जाने को कहा?'॥5॥
 
'Where is Shri Raghuveer, who used to protect us or the entire world, going when the King, who was put in trouble by Kaikeyi, asked him to go to the forest? 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas