श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम के वनगमन से रनवास की स्त्रियों का विलाप तथा नगरनिवासियों की शोकाकुल अवस्था  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.41.4 
कौसल्यायां महातेजा यथा मातरि वर्तते।
तथा यो वर्ततेऽस्मासु महात्मा क्व नु गच्छति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'वे महाबली महात्मा श्री रामजी कहाँ जा रहे हैं, जिन्होंने हमारे साथ वैसा ही व्यवहार किया जैसा उन्होंने अपनी माता कौशल्या के साथ किया था?॥ 4॥
 
'Where is that mighty saint Shri Ram going, who treated us in the same manner as he treated his mother Kausalya?॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas